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पेगासस विवाद: जांच आयोग के गठन के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को भेजा नोटिस

डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका पर बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया जिसमें पेगासस जासूसी प्रकरण के आरोपों की पड़ताल करने के लिए जांच आयोग गठित करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है। प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण, न्यायामूर्ति सूर्यकांत और न्यायामूर्ति अनिरूद्ध बोस की तीन सदस्यीय पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए बंगाल के साथ केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया और इस मामले को 25 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। वकील सौरभ मिश्रा ने पीठ से कहा कि उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जांच आयोग के गठन के लिए जारी अधिसूचना को उसके अधिकार क्षेत्र के आधार पर चुनौती दी है। पीठ ने कहा, हम नोटिस जारी कर रहे हैं।

हाल में बंगाल सरकार की ओर से गठित जांच आयोग को एनजीओ ग्लोबल विलेज फाउंडेशन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायामूर्ति (रिटायर्ड) मदन बी लोकुर और कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) ज्योतिर्मय भट्टाचार्य को जांच आयोग का सदस्य बनाया है। इस आयोग के गठन की घोषणा राज्य सरकार ने पिछले महीने की थी। याचिका में कहा गया है कि जब सुप्रीम कोर्ट खुद इस मामले की सुनवाई कर रहा है तो ममता सरकार द्वारा आयोग का गठन क्यों किया गया? याचिका में बंगाल सरकार के 27 जुलाई के आयोग के गठन से संबंधित नोटिफिकेशन को रद करने की मांग की गई है।

साथ ही आयोग के कामकाज पर रोक लगाने का आदेश देने की गुहार लगाई गई है। उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के एक संघ ने पिछले दिनों दावा किया कि भारत के 300 से ज्यादा सत्यापित फोन नंबर उस सूची में शामिल थे जिन्हें पेगासस स्पाईवेयर का इस्तेमाल कर निगरानी के लिए संभावित रूप से रखा गया था। इसको लेकर खासा विवाद हुआ था। इसके बाद बंगाल देश में पहला राज्य है जिसने जासूसी विवाद की पड़ताल के लिए जांच आयोग का गठन किया।

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