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पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा की जयंती पर नमन

हमेशा सुर्खियों से दूर रहने वाले प्रधानमंत्री थे श्री नंदा

भारत के प्रधानमंत्रियों के अतिरिक्त कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में दो बार जिम्मेवारियों के निर्वाहन करने वाले अंतरिम प्रधान मंत्री गुलजारीलाल नंदा को उनकी 122 जन्म जयंती (4 जुलाई, 1898, सियालकोट, पंजाब, तत्कालीन भारत) पर हार्दिक नमन I
संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार प्रधानमंत्री के पद को रिक्त नहीं रखा जा सकता। कांग्रेस पार्टी के प्रति समर्पित गुलज़ारीलाल नंदा प्रथम बार पंडित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद 27 मई, 1964 से 9 जून, 1964 में तथा दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद र 11 जनवरी 1966 से 24 जनवरी, 1966 में यह कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने। इनका कार्यकाल दोनों बार उसी समय तक सीमित रहा जब तक की कांग्रेस पार्टी ने अपने नए नेता का चयन नहीं कर लिया।
गुलज़ारीलाल नंदा एक राष्ट्रभक्त व्यक्ति थे। 1921 में उन्होंने असहयोग आन्दोलन में भाग लिया। उन्होंने मुम्बई के ‘नेशनल कॉलेज’ में अर्थशास्त्र के व्याख्याता के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। अहमदाबाद की ‘टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री’ में यह ‘लेबर एसोसिएशन’ के सचिव भी रहे। यह श्रमिकों की समस्याओं को लेकर सदैव जागरूक रहे और उनका निदान करने का प्रयास करते रहे। 1932 में सत्याग्रह आन्दोलन के दौरान और 1942-1944 में भारत छोड़ो आन्दोलन के समय इन्हें जेल भी जाना पड़ा।
गुलज़ारीलाल नन्दा को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न (1997) और दूसरा सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ प्रदान किया गया।
गुलजारीलाल नन्द लगभग 100 वर्ष की अवस्था में 15 जनवरी, 1998 को इनकी मृत्यु हो गई । इन्हें एक स्वच्छ छवि वाले गांधीवादी राजनेता के रूप में सदैव याद रखा जाएगा।

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