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बंगाल में अब बंगाली और बिहारी की राजनीति, ममता बनर्जी ने अब मांगा हिंदी भाषियों का समर्थन

अभिषेक पाण्डेय, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दिन अब दूर नहीं. ऐसे में जब भारतीय जनता पार्टी के आला दर्जे के नेता बंगाल में आकर सभाएं कर रहे हैं, तो तृणमूल कांग्रेस के कई नेता उन्हें बाहरी कह कर संबोधित कर रहे हैं. जिससे हिंदीभाषी मतदाताओं में तृणमूल के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है.

इसी बढ़ते असंतोष को देखते हुए अब ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल में जुट गई हैं. अपने वोटों की संख्या को गिरते देख ममता बनर्जी ने गुरुवार को कोलकाता के अपने मुख्यालय में हिंदी भाषियों के साथ सीधा संवाद किया. इस संवाद के दौरान उन्होंने बंगाल में रह रहे सभी हिंदी भाषियों को लुभाने की नाकाम कोशिश की और उनसे समर्थन की अपील करते हुए कहा कि हम पर भरोसा रखें.

संवाद के दौरान उन्होंने पिछले 10 वर्षों में हिंदी भाषियों के हित में किए गए कार्यों व उपलब्धियों को भी गिनाया. उनके अनुसार पिछले 10 वर्षों में राज्य में कई हिंदी अकादमी से लेकर विश्वविद्यालय व कॉलेजों की भी स्थापना की गई है. उनका कहना है कि हम हर समय आपके साथ खड़े हैं.

भारतीय जनता पार्टी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने हिंदी भाषियों से अपील की कि उनकी बातों पर ध्यान ना दें. इसी के साथ उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं बंगाली से भी ज्यादा हमें बिहारी का वोट मिले. आपको बता दें कि इसी दौरान ममता बनर्जी ने यह तक कह दिया कि हमारे सुरक्षा गार्ड और ड्राइवर भी हिंदी भाषी है जिनके हाथों में हमारे जिंदगी की स्टीयरिंग है.

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के अधिकतर आईएएस व आईपीएस अधिकारी भी बिहार, यूपी व अन्य हिंदीभाषी राज्यों से हैं. जिन्हें उनकी सरकार ने महत्वपूर्ण पदों पर मौका दिया है. उनका कहना है कि हमने बिहारी राजीव सिन्हा को मुख्य सचिव बना दिया था. डीजीपी वीरेंद्र हरियाणा से हैं.

इसी के साथ ममता बनर्जी ने अन्य कई वरिष्ठ अधिकारियों का नाम गिनाया जो विभिन्न विभागों में सचिव व पुलिस के तौर पर तैनात हैं. गौरतलब है कि जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, तृणमूल कांग्रेस की वोटों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है और इसी वजह से अब बंगाल में बंगाली और बिहारी की राजनीति शुरू हो चुकी है.

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