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बंगाल में भाजपा की बढती ताकत, विरोधी दलों में बैचेनी का सबब

दिलीप घोष पर हमले की घटना से भाजपा लहर में आई तेजी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भाजपा का बढता जनाधार विपक्षी दलों के लिए भी बेचैनी का सबब बना हुआ है। जहां सत्ताधारी पार्टी के साथ भाजपा के कार्यकर्ताओं का टकराव अखबारों व मीडिया की सुर्खियों में थी, वहीं अब भाजपा अध्यक्ष व सांसद दिलीप घोष पर हमले के बाद विरोध प्रदर्शन व पथावरोध का सिलसिला जारी है। भाजपा कार्यकर्ताओं में अपने अध्यक्ष पर हमले को लेकर खासा आक्रोश देखा जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा इसे भुनाने में कोई कोर कसर नहीं छोडना चाहती है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस घटना पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं आना यह साबित करता है कि वह भाजपा को माइलेज नहीं देना चाहती है। लेकिन यह सच है कि लगातार भाजपा के नेताओं पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की ओर से हमले की घटना से यह बात साबित होती है कि सत्ताधारी पार्टी को कहीं न कहीं यह लगता है कि भाजपा ही उसकी मुख्य विपक्षी है। पहले जहां इसी तरह से वाम मोर्चे के शासनकाल में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं व कार्यकर्ताओं पर हमले की खबरे सुर्खियों में रहती थी। बाद में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इसका जमकर लाभ उठाया और वह सत्ता में आने में सफल रही। आने वाले समय में भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष भी यही तरीक अपनाकर भाजपा को पश्चिम बंगाल की कुर्सी दिलाने में सफलता प्राप्त कर सकते हैं, इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता। भाजपा कार्यकर्ताओं ने लगातार लाकडाउन व कोरोना से लेकर अब अम्फन की राशि को लेकर सत्ताधारी दल को दबाब में रखने का काम सफलतापूर्वक किया है। अब आने वाले समय में यह देखना काफी रोचक होगा कि उंट किस करवट बैठता है।

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